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मस्जिदों में सांसदों की एंट्री पर रोक, कनाडा के मुस्लिम संगठनों ने क्यों लिया ये फैसला जाने?

इजराइल के हमलों का विरोध न करने पर कनाडा के मुसलमानों ने कनाडाई सांसदों के मस्जिद में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है. रमजान के महीने से पहले कनाडा की 300 से ज्यादा मुस्लिम संस्थाओं ने ये ऐलान किया है. 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा पर हमले करने शुरू किए थे.

रमजान के महीने से पहले कनाडा की 300 से ज्यादा मुस्लिम संस्थाओं ने ये ऐलान किया है.

रमजान से पहले कनाडा के मुसलमानों ने बड़ा फैसला लिया है. उसकी 300 से ज्यादा मुस्लिम संस्थाओं ने ऐलान किया कि कनाडा की मस्जिदों में उन सांसदों को एंट्री नहीं दी जाएगी जिन्होंने मानव अधिकारों की रक्षा के लिए कदम नहीं उठाए और गाजा में इजराइल के हमलों की निंदा नहीं की. मुस्लिम संगठनों ने एक खुला पत्र लिख इस बात का ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि जब तक सांसद इजराइल की निंदा नहीं करते तब हम उनको मस्जिदों में मंच नहीं देंगे.

पवित्र महीने रमजान के शुरू होने में कुछ ही वक्त या दिन बाकी है, ऐसे में गाजा के नागरिक इजराइल के हमलों का लगातार निशाना बन रहे हैं, जिसको लेकर दुनियाभर के कई देश और मानव अधिकार संगठन भी  चिंतित हैं. कनाडाई मुस्लिम संस्थाओं ने सर्वसम्मति से कहा है कि सांसदों का किसी भी मस्जिद में स्वागत नहीं किया जाएगा, जब तक कि वे सार्वजनिक रूप से गाजा में इजराइल के वॉर क्राइम की निंदा नहीं करते. ऐलान करने वाली संस्थाओं में कनाडा के मुसलमानों पर खासा असर रखने वाली नेशनल काउंसिल ऑफ कनाडाई मुस्लिम भी मुख्य रूप से शामिल है.

 

वॉर क्राइम की निंदा नहीं तो मस्जिदों में स्वागत नहीं होगा.

मुस्लिम समूह के लेटर में कहा गया है, “अगर आप खुले तौर से और सम्मान के साथ इस पत्र में लिखी सभी बातों से सहमत नहीं है, तो हम आपको हमारी सभाओं को संबोधित करने के लिए मंच प्रदान नहीं करेंगे.” लेटर में ये भी लिखा गया है कि रमजान का महीना मानवता के लिए होता है. हम इस महीने में सिर्फ उन्हीं सांसदों का मस्जिदों में स्वागत करेंगे जिन्होंने मानवता को बचाने के लिए अपनी आवाज बुलंद की है या उठाई है. साथ ही इजराइल के वॉर क्राइम का विरोध किया है. रमजान का महीना ग्रेगोरियन कैलेंडर की 10 मार्च से शुरू हो रहा है. लेटर में सांसदों से गाजा पर हमले रोकने के लिए आवाज उठाने और इजराइल को हथियार सप्लाई करने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है.

जंग में 29 हजार से ज्यादा मौत हुआ।

7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा पर हमले करने शुरू किए थे, जिसके बाद करीब 4 महीनों से भी ज्यादा का वक्त बीत गया है. अब तक इजराइली बमबारी में 29,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए और 69,000 से अधिक घायल हुए हैं. इसके अलावा संपत्तियों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. इस समय गाजा के लोग बुनियादी जरूरतों की कमी से जूझ रहे हैं।

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