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रेल टेका डहर छेका कार्यक्रम में गोड्डा रेललाइन में हजारों-हजार की संख्या में उतरे कुड़मि समाज।

रेल टेका डहर छेका कार्यक्रम में गोड्डा रेललाइन में हजारों-हजार की संख्या में उतरे कुड़मि समाज।

गोड्डा जिला संथालपरगना में एतिहासिक रहा रेल टेका आंदोलन

 रेलवे ट्रैक में लोगों का  जन सेलाभ

*गोड्डा*: गोड्डा रेलवे ट्रेक पर हजारों- हजार की संख्या में उतरे कुड़मि समुदाय “छोटानागपुरी कुड़मि जनजाति परिषद संथालपरगना” के बैनर तले अपनी मांगो को लेकर कुड़मि समुदाय का रेल टेका डहर छेका कार्यक्रम सफल रहा। संयोजक मंडली सदस्य संजीव कुमार महतो ने कहा कि 6 सितम्बर 1950 की सरकारी भूल के कारण द शेड्यूल ट्राइब आर्डर 1950 में कुड़मि का उल्लेख छुट गया जिसे भारत सरकार को सुधार का लगातार आग्रह किया जाता रहा है रविन्द्र महतो ने कहा कि कुड़मि जनजाति को अनुसुचित जनजाति (एसटी) सूची में संशोधन कर अंकित नहीं किया गया। इस सबंध में नये समुदाय वाला प्रक्रिया में बार बार कुड़मि समुदाय के विषय को धकेल दिया जा रहा है, के0 पी0 महतो ने कहा कि अनावश्यक रूप से राज्य सरकार और टीआरआई के तरफ डायभर्ट कर 75 वर्षो से एसटी सुची में रहने की अहर्ता अनुशंसा के बावजूद दरकिनार रखा गया है। देवेंद्र कुमार महतो ने कहा कि कुड़मि तात्कालीन एकीकृत उड़ीसा बिहार के समय 1931 व उससे पूर्व से अनुशंसित आदिवासी है अजय मुर्मू ने कहा की 1950 की प्रथम एसटी सुची में ही उल्लेख रहना चाहिए था। इस भुल के संदर्भ में सुधार हेतु बाद के राज्य सरकारों ने भी नहीं किया और ना वर्तमान झारखंड सरकार कर रहा है। दीपक महतो ने कहा कि केंद्र की सरकार स्वत: संज्ञान लेकर उक्त संशोधन कर कुड़मि को एसटी के रूप में उसी 1950 वाली सुची का अंश स्वीकार कर रही है। दिनेश कुमार महतो ने कहा कि 1950 के बाद से लगातार सरकार को समाजिक राजनीतिक संगठनों व विधायक सांसदों द्वारा मांग रखा जाता रहा है लेकिन सरकार लगातार 75 वर्षों से नजरअंदाज कर रही है।

कुड़मि समुदाय की प्रमुख मांगे:

1, छोटानागपुर पठार ( झारखंड, आंशिक पश्चिम बंगाल व आंशिक उड़ीसा के वे जिले जो बृहद झारखंड क्षेत्र के रूप में चिह्नित हैं) के कुड़मि समुदाय जो “द शेड्यूल ट्राइब आर्डर 1950” द्वारा 6 सितम्बर 1950 को जारी शेड्यूल ट्राइब सूची में सरकारी भूल से उल्लेख नही किये गये, इसलिए कुड़मालि को उसी आर्डर का अंश स्वीकार किया जाय।
2, आगामी जनगणना में कुड़मालि भाषा का अलग से गणना कालम किया जाय।

3, कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूचि में सूचीबद्ध किया जाय।

4, क्रम संख्या 1 के मांग का समाधान से संबंधित प्रस्ताव छोटानागपुर पठार भौगोलिक क्षेत्र अंतर्गत झारखंड सरकार व पश्चिम बंगाल तथा उड़ीसा सरकार द्वारा केंद्र सरकार को भेजा जाय।

5, सिद्धो कान्हो विश्वविद्यालय दुमका झारखंड में झारखंड के अन्य विश्व विद्यालय की तरह कुड़मालि भाषा विभाग की स्थापना कर कुड़मालि भाषा का पठन पाठन शोध प्रारंभ किया जाय।

छोटानागपुरी कुड़मि जनजाति परिषद संथालपरगना के संयोजक मंडली सदस्य संजीव कुमार महतो, रविन्द्र महतो, के0 पी0 महतो, देवेंद्र कुमार महतो, रजनीकांत महतो, दीपक महतो, दिनेश कुमार महतो, संजय महतो, प्रवीण महतो, हाराधन महतो, दयानंद भारती, प्रफुल्ल महतो, केदार महतो, संजय महतो, अजय महतो, खगेश महतो, जयकिशोर महतो, राजेश महतो, दीपक कुमार महतो, रमेश कुमार महतो, सोमनाथ महतो, गौतम कुमार महतो, किशोर कुमार महतो, बालमुकुंद महतो, लंबोदर महतो, रविन्द्र कुमार, मंटू महतो, अनिल महतो, बिनोद महतो, पंकज महतो , दशरथ महतो, विक्रम महतो, बजरंग महतो, उपदेश महतो, वीरेन्द्र महतो, सुनील महतो, संदीप महतो, सोनू महतो, राजेन्द्र महतो, राजू महतो, जगरनाथ महतो, उदय महतो, रंजित महतो, पानवती महतो, बबीता महतो, प्रेमलता महतो, सोनी महतो, कलावती महतो, रेखा महतो, देवेंद्र महतो, निताइ महतो, किरण, दीप्ति , मीणा, बीणा एवं हजारों-हजार की संख्या में बच्चे महिला पुरुष उपस्थित हुए।

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